Transformer क्या है? इसके प्रकार, भाग एवं कार्य?

आज के समय बिजली हमारे जीवन का कितना अभिन्न अंग बन चुकी है। यह आप शायद नहीं जानते होंगे क्योंकि अधिकतर लोग मानते हैं कि इंटरनेट की वजह से हमारा जीवन काफी ज्यादा सफल हो रहा है। लेकिन उसके पीछे कहीं ना कहीं बिजली का हाथ भी जरूर है।

क्योंकि जब भी किसी को प्रयोग करने की आवश्यकता होती है तो सबसे पहले उसको चार्ज किया जाता है। इसके साथ ही बिजली के द्वारा होता है आज भी आने लगे हैं। लेकिन बिजली विद्युत का सबसे पहला साधन रहेगी इसके साथ ही हम तक बिजली ट्रांसफार्मर के माध्यम से पहुंचती है। हालांकि ट्रांसफार्मर का इसमें काफी जाता रोल होता है।

अगर आप भी ट्रांसफार्मर क्या है इसके बारे में जानने के लिए आए हैं तो आप बिल्कुल सही आर्टिकल पर आए हैं। इस आर्टिकल में हम आपको स्टेप बाय स्टेप बताने वाले हैं कि ट्रांसफार्मर क्या होता है। इसके साथ ही ट्रांसफार्मर कितने प्रकार का होता है वह भी हम आप को विस्तारपूर्वक बताएंगे। वही ट्रांसफार्मर के भागवत कार्य भी हम आपको बताने वाले हैं।

अगर आपको ट्रांसफार्मर से संबंधित कोई भी सवाल में समस्या आती है तो आप हमसे सवाल भी कर सकते हैं। इसके साथ ही ट्रांसफार्मर के बारे में पूरी जानकारी के लिए आपको नीचे दिया का आर्टिकल फॉलो करना पड़ेगा।

ट्रांसफार्मर क्या है?

अगर आपने अपने आसपास ट्रांसफार्मर देखे होंगे तो आपके मन में एक सवाल जरूर आया होगा कि आखिर का ट्रांसफार्मर क्या होते हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ट्रांसफार्मर एक प्रकार का इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस होता है जो कि विद्युत अंदर जी को अपने पास संरक्षित करता है तथा उसके बाद उसे एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने का कार्य करता है।

आपके घर जो भी एनर्जी आती है वह तारों के माध्यम से तो आती है। लेकिन उसमें मेन काम ट्रांसफार्मर का भी होता है क्योंकि वह एक जगह से दूसरे जगह की विद्युत एनर्जी को अपने पास और करके रखता है। उसके बाद उसी एनर्जी को वह एक जगह से दूसरी जगह तक आसानी से बिना उस एनर्जी का लॉस किए पहुंचाता है।

किसी भी ट्रांसफार्मर में दो प्रकार के सोर्स होते हैं जिन्हें प्रायमरी वाइंडिंग तथा सेकेंडरी वाइंडिंग कहा जाता है। आपकी जानकारी के लिए बता दें की प्राइमरी वाइंडिंग का काम किसी भी एनर्जी को अपने पास खींचने का होता है तथा सेकेंडरी वाइंडिंग उस एनर्जी को दूसरी जगह पर पहुंचाता है।

आज के समय में घर घर पर बिजली पहुंचाने में ट्रांसफार्मर का बहुत ही बड़ा योगदान है और जब से इसका आविष्कार हुआ है तब से तो यह काफी ज्यादा पॉपुलर हो चुका है। क्योंकि इसके द्वारा किसी भी एनर्जी को बिना उस एनर्जी का लॉस हुए पहुंचाया जा सकता है।

ट्रांसफार्मर के भाग

अगर आपने ट्रांसफार्मर देखा होगा तो आपने जरूर सोचा होगा कि ट्रांसफार्मर आखिर किन किन चीजों से मिलकर बना होता है। आज हम इस आर्टिकल में आपको निम्नलिखित बताने वाले हैं कि ट्रांसफार्मर के भाग कौन-कौन से होते हैं तथा उनका कार्य क्या है।

1. इनपुट कनेक्शन

किसी भी ट्रांसफार्मर में इनपुटकनेक्शन काफी ज्यादा महत्वपूर्ण होता है क्योंकि इसे प्राइमरी कनेक्शन के नाम से भी जाना जाता है। क्योंकि किसी भी सप्लाई का इनपुटकनेक्शन इसी से जुड़ा होता है और इसका योगदान किसी भी ट्रांसफार्मर में काफी महत्वपूर्ण होता है।

2. आउटपुट कनेक्शन

आउटपुट कनेक्शन को सेकेंडरी वाइंडिंग भी कहा जाता है। क्योंकि जब भी किसी जगह पर बिजली को भेजा जाता है तो उसके लिए पावर की आवश्यकता होती है। लेकिन कितनी पावर भेजनी है यह आउटपुट कनेक्शन ही डिसाइड करता है और यही वजह है कि आपके घर में जो उस जाती है। वह एकदम 220 वोल्ट के आस पास रहती है।

3. वाइंडिंग

जैसा कि हमने आपको आर्टिकल में बताया है कि कोई भी ट्रांसफार्मर सेकेंडरी वाइंडिंग तथा प्राइमरी वाइंडिंग से मिलकर बना होता है। इसी प्रकार वाइंडिंग का किसी भी ट्रांसफार्मर में काफी ज्यादा योगदान रहता है।

4. Core

कोर मुख्यता रूप से सिलिकॉन स्टील की पत्तियां होती है जिनकी चौड़ाई बहुत कम होती है और इसका योगदान किसी भी बिजली के आवेग को एक जगह से दूसरी जगह तक पहुंचाना होता है।

5. Coil

जैसा कि आपको अब यह तो पता लग गया होगा कि किसी भी ट्रांसफार्मर में इनपुट तथा आउटपुट कनेक्शन दिया होता है। लेकिन उन इनपुट और आउटपुट कनेक्शन को आपस में कोयल के माध्यम से ही जोड़ा जाता है।

6. Oil Level इंडिकेटर

किसी भी ट्रांसफार्मर में 1 मीटर तक ऑयल भरा जाता है लेकिन उस ऑयल को हिंदी चैट करने के लिए ऑयल लेवल इंडिकेटर डाला जाता है। ताकि पता चल सके कि कितना ऑयल कम है और कितना आयल डालने की आवश्यकता है।

7. इंसुलेटेड शीट

जब भी प्राइमरी वेंडिंग तथा सेकेंडरी वेंडिंग को आपस में जोड़ा जाता है। तब उनके बीच शार्ट सर्किट ना हो इसलिए बचने के लिए इंसुलेटेड स्वीट का प्रयोग किया जाता है। यही वजह है कि प्राइमरी वाइंडिंग तथा सेकेंडरी वाइंडिंग के बीच शार्ट सर्किट काफी कम होता है।

8. कन्वर्सेशन टैंक

यह मुख्यता रूप से लगभग सभी ट्रांसफार्मर में प्रयोग किया जाता है इसके अंदर तेल डाला जाता है।

9. Oil feeling पाइप

इसके साथ ही जब भी कोई कन्वर्शन टैंक ट्रांसफार्मर में लगाया जाता है तो उसके अंदर आयल डालने के लिए ऑयल फीलिंग पाइप का इस्तेमाल किया जाता है।

10. रेडिएटर फैन

जब भी कोई ट्रांसफार्मर कार्य करता है तो उसके अंदर सेकेंडरी वाइंडिंग के बीच शार्ट सर्किट होने के काफी ज्यादा खतरा रहता है क्योंकि वह काम करते वक्त काफी ज्यादा गर्म हो जाती है। वह ज्यादा गर्म ना हो इसीलिए रेडिएटर फैन का इस्तेमाल किया जाता है जो कि उसे समय-समय पर ठंडा करता रहता है।

निष्कर्ष

इस तरह से इस आर्टिकल में हमने आपको बताया कि ट्रांसफार्मर क्या होता है। इसके साथ ही ट्रांसफार्मर कार्य कैसे करता है वह भी हमने आपको बताया है कैसे ट्रांसफार्मर की सहायता से बिजली आपके घर तक पहुंची है। उसके बारे में हमने आपको संक्षिप्त रूप में बताया है वही हमने इसके साथ ही ट्रांसफार्मर के भाग तथा उसके कार्यों के बारे में भी चर्चा की है।

इसके साथ ही ट्रांसफार्मर के प्रकार के बारे में भी बताया है कि आखिर ट्रांसफार्मर कितने प्रकार के होते हैं। इसके बावजूद भी अगर आपको ट्रांसफार्मर से संबंधित कोई समस्या रहती है तो आप हमें कमेंट कर सकते हैं। ऐसी जानकारी के लिए आप हमें गूगल न्यूज़ तथा न्यूज़लेटर के माध्यम से भी सब्सक्राइब कर सकते हैं।

संबंधित प्रश्न

ट्रांसफार्मर का अविष्कार कब और किसने किया था?

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ट्रांसफार्मर का आविष्कार साल 1885 में 3 इंजीनियर द्वारा किया गया था। उन 3 इंजीनियर का नाम कुछ इस प्रकार था: ओटो ब्लाथी, मिक्सा डेरी और कैरोली ज़िपर्नोव्स्की।

Arun HindiSe Writer

ARUN KUMAR

अरुण कुमार hindise.in का कुशल और अनुभवी लेखक है। वह make money online, Tips & Tricks और biography जैसे विषयों पर लेख साझा करता है। उसने HindiSe समेत कई अन्य नामचीन हिंदी ब्लोगों के साथ काम किया है।

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