पिता पर हिन्दी में निबंध। Essay on Father in Hindi

पिता पर हिन्दी में निबंध। Essay on Father in Hindi

पिता शब्द का मतलब ही जिम्मेदारी होती है पिता ही घर के मुख्य व्यक्ति होते है जिनके के ऊपर पूरा घर होता है, उन पर पूरा घर की जिम्मेदारी होती है। पत्नी बच्चा मां बाप भाई बहन एवं पूरा परिवार उन पर टिका रहता है। वह अपने परिवार के लिए बहुत ही संघर्ष करते हैं।

पिता के लिए खास करके उनका बच्चा बहुत ही मायने रखता उसका भविष्य पिता के हाथों में ही होती है देखा जाए तो पिता के कंधों पर बहुत सी जिम्मेदारियां होती है और हर एक पिता एक जिम्मेदारियों को पूरा करना चाहते हैं।

उन्हें लगता है कि मेरा क्या मेरा दिल तो चला गया मेरे बच्चों को आगे तकलीफ न उठाना पड़े इसके लिए वह पहले से ही सोचते हर एक पिता का सपना होता है कि उसका बच्चा उन्नति के शिखर तक पहुंच पाए वह खुद खाना नहीं खाते। मगर अपने बच्चों के लिए पहले सोचते हैं |

अर्पिहर पिता का यही सपना होता है कि उसका बेटा पढ़ लिखकर बड़ा आदमी बने परिवार का नाम रोशन करें एक पिता को उनकी पत्नियों का भी जिम्मेदारी रहती है वह पूरा घर को खुश रखना चाहते हैं। यदि वह 50 कमाते हैं तो वह 40 अपने परिवार को देते हैं और 10 वह अपने बच्चों के भविष्य के लिए रखते हैं |

एक पिता अपने बच्चों के लिए क्या कुछ नहीं करते जब उनकी बेटी दुनिया में आती है तभी से वह उसके भविष्य के बारे में सोचने लगते हैं फिर बेटी को पढ़ाते लिखा थे और जब वह बड़ी हो जाती है तब उसके शादी के लिए वह अपनी सारी दौलत लगा देते अपनी खुशी का का परवाह किए बिना वह अपनी बेटी को सब कुछ दे देते हैं 

एक पिता अपने बच्चों से निस्वार्थ प्रेम करते हैं उनके पास पैसा हो ना हो लेकिन वह अपने बच्चों की साड़ी जिद पूरी करते हैं और जब उनका बच्चा खुश होता है तब उन्हें बहुत खुशी मिलती है। एक पिता अपनी सारी उम्र अपने बच्चों की खुशी में ही लुटा देते हैं और जब वह बूढ़ा हो जाता जाते हैं तब वह अपने फले फुले परिवार को देखकर उनकी आत्मा को सुकून सा मिलता है वह सोच सोचने लगते हैं।

हमने अपना मेहनत का फल पाया उन्हें उनका हरा भरा परिवार देखकर बहुत ही अच्छा लगता है और वह अपने आप पर गर्व महसूस करते हैं और उसके माता-पिता का कोऔर फिर वह पिता के पद से उठकर बड़े पापा दादा-दादी नाना-नानी बनते हैं तब जाकर वह ऐसे सोचते हैं। अब मुझ पर और भी जिम्मेदारियां आ गई एक पिता अपने बच्चों को जैसा संस्कार देते हैं।

वहीं संस्कार उनकी अगली पीढ़ी तक जाता है जो बात पिता बताते हैं वही बात वह अपने बच्चे को बताते हैं और अपने पोते पोतियो को तब जाकर उनके पिता के बारे में बताते हैं कि तुम्हारे पिता को हम बचपन में यह बोलते थे हम यहां रहते थे |

यह सब बताते हैं वह उनको बताते हैं अपने अगली पीढ़ी को देखकर वह बहुत ही वह यह सोचते हैं कि दिन कितना जल्दी निकल गया मेरा बेटा भी अब एक पिता बन गया और उस पर भी कितनी सारी जिम्मेदारियां आ गए यह सब सोचकर वह यह भी सोचने सोचने लगते हैं

कि अब यह भी अपनी जिम्मेदारी अच्छे से निभाएं और अपने कर्तव्य को पूरा करें और अपने पोता पोती को देख कर बोलते हैं बच्चों आओ मेरे पास बैठो मैं तुम्हें कहानियां सुना लूंगा तब भी उन पर यह जिम्मेदारियां होती है कि वह अपने पोते पोतियो को खुश रखे और पूरा परिवार को देख रेख करें करें और वह लास्ट तक अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करते हैं। यही उनकी जिंदगी का मकसद होता है।

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अरुण कुमार hindise.in का कुशल और अनुभवी लेखक है। वह make money online, Tips & Tricks और biography जैसे विषयों पर लेख साझा करता है। उसने HindiSe समेत कई अन्य नामचीन हिंदी ब्लोगों के साथ काम किया है।

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